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Saturday, 11 September 2021

जो हस्रते दिल है / अकबर इलाहाबादी

जो हस्रते दिल है, वह निकलने की नहीं

जो बात है काम की, वह चलने की नहीं

यह भी है बहुत कि दिल सँभाले रहिए
क़ौमी हालत यहाँ सँभलने की नहीं

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