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हास्य-रस -तीन / अकबर इलाहाबादी
हास्य-रस -चार / अकबर इलाहाबादी
हास्य-रस -दो / अकबर इलाहाबादी
हास्य-रस -एक / अकबर इलाहाबादी
चश्मे-जहाँ से हालते अस्ली छिपी नहीं / अकबर इलाहाबादी
सूप का शायक़ हूँ यख़नी होगी क्या / अकबर इलाहाबादी
तअज्जुब से कहने लगे बाबू साहब / अकबर इलाहाबादी
हस्ती के शजर में जो यह चाहो कि चमक जाओ / अकबर इलाहाबादी
बिठाई जाएंगी पर्दे में बीबियाँ कब तक / अकबर इलाहाबादी
हिन्द में तो मज़हबी हालत है अब नागुफ़्ता बेह / अकबर इलाहाबादी
आपसे बेहद मुहब्बत है मुझे / अकबर इलाहाबादी
ख़ुशी है सब को कि आप्रेशन में ख़ूब नश्तर चल रहा है / अकबर इलाहाबादी
जान ही लेने की हिकमत में तरक़्क़ी देखी / अकबर इलाहाबादी
दम लबों पर था दिलेज़ार के घबराने से / अकबर इलाहाबादी
शक्ल जब बस गई आँखों में तो छुपना कैसा / अकबर इलाहाबादी
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