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बज़ाहिर प्यार की दुनिया में जो नाकाम होता है / अदम गोंडवी

बज़ाहिर प्यार की दुनिया में जो नाकाम होता है
कोई रूसो कोई हिटलर कोई खय्याम होता है

ज़हर देते हैं उसको हम कि ले जाते हैं सूली पर
यही हर दौर के मंसूर का अंजाम होता है

जुनूने-शौक में बेशक लिपटने को लिपट जाएँ
हवाओं में कहीं महबूब का पैगाम होता है

सियासी बज़्म में अक्सर ज़ुलेखा के इशारों पर
हकीकत ये है युसुफ आज भी नीलाम होता है
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भुखमरी की ज़द में है या दार के साये में है / अदम गोंडवी

भुखमरी की ज़द में है या दार के साये में है
अहले हिन्दुस्तान अब तलवार के साये में है

छा गई है जेहन की परतों पर मायूसी की धूप
आदमी गिरती हुई दीवार के साये में है

बेबसी का इक समंदर दूर तक फैला हुआ
और कश्ती कागजी पतवार के साये में है

हम फ़कीरों की न पूछो मुतमईन वो भी नहीं
जो तुम्हारी गेसुए खमदार के साये में है

आँख पर पट्टी रहे और अक़्ल पर ताला रहे / अदम गोंडवी

आँख पर पट्टी रहे और अक़्ल पर ताला रहे
अपने शाहे-वक़्त का यूँ मर्तबा आला रहे

तालिबे शोहरत हैं कैसे भी मिले मिलती रहे
आए दिन अख़बार में प्रतिभूति घोटाला रहे

एक जनसेवक को दुनिया में अदम क्या चाहिए
चार छ: चमचे रहें माइक रहे माला रहे

जो डलहौज़ी न कर पाया वो ये हुक़्क़ाम कर देंगे / अदम गोंडवी

जो डलहौज़ी न कर पाया वो ये हुक़्क़ाम कर देंगे
कमीशन दो तो हिन्दोस्तान को नीलाम कर देंगे

ये बन्दे-मातरम का गीत गाते हैं सुबह उठकर
मगर बाज़ार में चीज़ों का दुगुना दाम कर देंगे

सदन में घूस देकर बच गई कुर्सी तो देखोगे
वो अगली योजना में घूसखोरी आम कर देंगे

मैं चमारों की गली तक ले चलूँगा आपको / अदम गोंडवी

आइए महसूस करिए ज़िन्दगी के ताप को
मैं चमारों की गली तक ले चलूँगा आपको

जिस गली में भुखमरी की यातना से ऊब कर
मर गई फुलिया बिचारी एक कुएँ में डूब कर

है सधी सिर पर बिनौली कंडियों की टोकरी
आ रही है सामने से हरखुआ की छोकरी

चल रही है छंद के आयाम को देती दिशा
मैं इसे कहता हूं सरजूपार की मोनालिसा

कैसी यह भयभीत है हिरनी-सी घबराई हुई
लग रही जैसे कली बेला की कुम्हलाई हुई

कल को यह वाचाल थी पर आज कैसी मौन है
जानते हो इसकी ख़ामोशी का कारण कौन है

थे यही सावन के दिन हरखू गया था हाट को
सो रही बूढ़ी ओसारे में बिछाए खाट को

डूबती सूरज की किरनें खेलती थीं रेत से
घास का गट्ठर लिए वह आ रही थी खेत से

आ रही थी वह चली खोई हुई जज्बात में
क्या पता उसको कि कोई भेड़िया है घात में

होनी से बेखबर कृष्णा बेख़बर राहों में थी
मोड़ पर घूमी तो देखा अजनबी बाहों में थी

चीख़ निकली भी तो होठों में ही घुट कर रह गई

एहसास में शिद्दत है वही, कम नहीं होती / अकील नोमानी

एहसास में शिद्दत है वही, कम नहीं होती 
इक उम्र हुई, दिल की लगी कम नही होती

लगता है कहीं प्यार में थोड़ी-सी कमी थी 
और प्यार में थोड़ी-सी कमी कम नहीं होती

अक्सर ये मेरा ज़ह्न भी थक जाता है लेकिन 
रफ़्तार ख़यालों की कभी कम नहीं होती

था ज़ह्र को होंठों से लगाना ही मुनासिब 
वरना ये मेरी तश्नालबी कम नहीं होती

मैं भी तेरे इक़रार पे फूला न समाता 
तुझको भी मुझे पाके खुशी कम नहीं होती

फ़ितरत में तो दोनों की बहुत फ़र्क़ है लेकिन 
ताक़त में समंदर से नदी कम नहीं होती

जो कहता था हमारा सरफिरा दिल, हम भी कहते थे / अकील नोमानी

जो कहता था हमारा सरफिरा दिल, हम भी कहते थे 
कभी तनहाइयों को तेरी महफ़िल, हम भी कहते थे

हमें भी तजरिबा है कुफ्र की दुनिया में रहने का 
बुतों के सामने अपने मसाइल हम भी कहते थे 

यहाँ इक भीड़ अंजाने में दिन कहती थी रातों को 
उसी इक भीड़ में हम भी थे शामिल, हम भी कहते थे