आज़ाद हो चुके थे, बन्दा बना के मारा
आँखों में तेरी ज़ालिम छुरियाँ छुपी हुई हैं
देखा जिधर को तूने पलकें उठाके मारा
ग़ुंचों में आके महका, बुलबुल में जाके चहका
इसको हँसा के मारा, उसको रुला के मारा
नरगिस में इसने छिप कर आँखें लड़ा के मारा
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