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बज़ाहिर प्यार की दुनिया में जो नाकाम होता है / अदम गोंडवी

बज़ाहिर प्यार की दुनिया में जो नाकाम होता है कोई रूसो कोई हिटलर कोई खय्याम होता है ज़हर देते हैं उसको हम कि ले जाते हैं सूली पर यही हर दौर ...

शक्ल जब बस गई आँखों में तो छुपना कैसा / अकबर इलाहाबादी

शक्ल जब बस गई आँखों में तो छुपना कैसा
दिल में घर करके मेरी जान ये परदा कैसा

आप मौजूद हैं हाज़िर है ये सामान-ए-निशात 
उज़्र सब तै हैं बस अब वादा-ए-फ़रदा कैसा 

तेरी आँखों की जो तारीफ़ सुनी है मुझसे 
घूरती है मुझे ये नर्गिस-ए-शेहला कैसा 

ऐ मसीहा यूँ ही करते हैं मरीज़ों का इलाज 
कुछ न पूछा कि है बीमार हमारा कैसा 

क्या कहा तुमने, कि हम जाते हैं, दिल अपना संभाल 
ये तड़प कर निकल आएगा संभलना कैसा

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