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बज़ाहिर प्यार की दुनिया में जो नाकाम होता है / अदम गोंडवी

बज़ाहिर प्यार की दुनिया में जो नाकाम होता है कोई रूसो कोई हिटलर कोई खय्याम होता है ज़हर देते हैं उसको हम कि ले जाते हैं सूली पर यही हर दौर ...

जो यूं ही लहज़ा लहज़ा दाग़-ए-हसरत की तरक़्क़ी है / अकबर इलाहाबादी

जो यूं ही लहज़ा-लहज़ा दाग़-ए-हसरत की तरक़्क़ी है 
अजब क्या, रफ्ता-रफ्ता मैं सरापा सूरत-ए-दिल हूँ 

मदद-ऐ-रहनुमा-ए-गुमरहां इस दश्त-ए-गु़र्बत में 
मुसाफ़िर हूँ, परीशाँ हाल हूँ, गु़मकर्दा मंज़िल हूँ 

ये मेरे सामने शेख-ओ-बरहमन क्या झगड़ते हैं 
अगर मुझ से कोई पूछे, कहूँ दोनों का क़ायल हूँ 

अगर दावा-ए-यक रंगीं करूं, नाख़ुश न हो जाना 
मैं इस आईनाखा़ने में तेरा अक्स-ए-मुक़ाबिल हूँ

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